Tujhe| gskidiary तुझे छोड़ भला कैसे जाऊँगा मैं हाथ थामोगे तो उम्र भर निभाऊँगा मैं। मे…
ग़ज़ल ये जो कब्र के अन्दर जमीं में सोया है। बहुत ज़ख्म खाएँ हैं बहुत कुछ खोया है।। सार…
ग़ज़ल महफ़िलों में भी ग़म का खज़ाना न गया। अश्क़ आँखों का फिर से रुलाना न गया।। दर्द अपन…
गज़ल किस्मत के अठखेलियों की अदा नहीं मालूम। सबके हाथ उठे दुआ को पर ख़ुदा नहीं मालूम।। ज…
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